मेरा वो छोटा सा घर
मेरा वो छोटा सा घर मेरा वो छोटा सा घर, दो कमरों का नन्हा सा घर, कहने को तो छोटा था मेरा घर, लेकिन हम सब और बहुतेरे सारे, हँसते, गाते; समा जाते थे उसकी आगोश में. आज जब मेरे बंगले में एक मेरी अभिलाषा, समाविष्ट नहीं हो पाती है, तब याद आता है मुझे मेरा वो छोटा सा घर . मेरा वो छोटा सा घर, जब पंखे की हवा मन को शांत कर देती थी, सुराही का सौंधा पानी शीतलता का उदहारण हुआ करता था. आज जब मेरे बंगले में फ्रिज और ए . सी ., गर्मी को काटने का नाटक करते दिखते हैं, तब याद आता है मुझे मेरा वो छोटा सा घर . मेरा वो छोटा सा घर, रंसोई में पकते माँ के हाँथ के खाने की खुशबू, सुगन्धित करती पूरे घर को , पड़ोस को. आज जब मेरे बंगले में इत्र की बहुतायत है, ह्रदय को स्पर्श कर जाए, ऐसी क्षमता किसी एक खुशबू में भी नहीं है, तब याद आता है मुझे मेरा व...