Friday, June 22, 2012

आओ लिखें कुछ नया

आओ लिखें कुछ नया



आओ लिखें कुछ नया,
आकांक्षा की स्याही से,
नवचेतना के पन्नो पर,
कुछ कुरेंदे, कुछ उकेरें,
आओ लिखें कुछ नया.
 
 
आओ लिखें कुछ नया,
ऐसा जो बस ऐसा हो,
बिलकुल जीवन के जैसा हो,
कुछ सुबह, कुछ शाम,
आओ लिखें कुछ नया.
 
 
आओ लिखें कुछ नया,
लेखनी स्वतः अपनी राह पकड़ ले,
विचार उन्मुक्त हो बह निकलें,
कुछ ज़ाहिर, कुछ छिपे,
आओ लिखें कुछ नया.
 
 
 
आओ लिखें कुछ नया,
कि पढ़े तो रस घुल जाए,
मानस पटल पर छाप छूट जाए,
कुछ धुंधली, कुछ शाश्वत,
आओ लिखें कुछ नया.
 
 
नवीनता तो नियम है,
परिवर्तन प्रकृति का सत्य है,
लिखेंगे तो लिख ही लेंगे,
कुछ नूतन, कुछ चिरन्तन,
आओ लिखें कुछ नया.
 
 
 
 
 

10 comments:

  1. यूँ ही निरंतर प्रयास ज़ारी रखे...बहुत बेहतर लिखा हैं

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    1. बहुत धन्यवाद, अनु जी.

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  2. बहुत बेहतरीन रचना....
    मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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  3. नव विधान हो,
    नव प्रधान हो,
    हृद से उमड़े,
    नवल ज्ञान हो।

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  4. कुछ नूतन, कुछ चिरन्तन,
    आओ लिखें कुछ नया.

    मन के भावों की सुंदर प्रस्तुति

    MY RECENT POST:...काव्यान्जलि ...: यह स्वर्ण पंछी था कभी...

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  5. बहुत रोचक और सुन्दर अंदाज में लिखी गई रचना .....आभार

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  6. नवीनता की ओर सोचना और बढ़ना मनुष्य का स्वभाव है.
    सुन्दर, सकारात्मक प्रस्तुति.

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  7. आओ लिखें कुछ नया......सुंदर भाव

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Your comments are of immense value. Thank you.